Friday, July 15, 2011

Sources of inspiration (1)

I would like to share following poetry to all persons which are starving for perfection and believe in improving their skills every day.


साधना

अभी मुझे
और भी 
धीमे चलना है...
अभी तो
चलने की
आवाज़ आती है.

                                     मुनि क्षमासागर

I have read this poetry 6-7 years before. It still inspires me for perfection.


3 comments:

  1. एक सुबह एक झेन गुरू काफ़ी परेशान हो गए। उनके शिष्यों ने उन्हें परेशान देखा पर कुछ पूछने की हिम्मत न कर सके। गुरू अपने रोज के तरीके से सब काम निपटा रहे थे पर फ़िर भी परेशानी तो साफ़ सब को उनके चेहरे पर झलक रही थी। दोपहर में जब गुरू आराम कर रहे थे तो उनके एक प्रिय शिष्य ने हिम्मत करके उनसे पूछा, "आप आज सुबह से बहुत परेशान दिख रहे हैं?"
    गुरू, "हाँ, कल रात मैंने एक सपना देखा। देखा कि मैं एक तितली हूँ - सुन्दर, स्वछन्द खुले आकाश में आजाद उड़ता हुआ...बहुत अच्छा लग रहा था। फ़िर अचानक नींद खुल गई।"
    शिष्य, "अरे तो फ़िर इसमें ऐसी परेशान होने वाली कौन सी बात है? ऐसा तो हमेशा सब के साथ होता रहता है। हम सब सपने देखते हैं। सपने में कभी हम अच्छी स्थिति में होते हैं कभी बुरी स्थिति में। पर जागने के बाद का सच तो अक्सर सपने से अलग होता है। तो अब जब आप जग गए हैं, सब शितियाँ साफ़ हैं तो इसमें परेशानी की बात क्या है?"
    गुरू, "कह तो तुम ठीक रहे हो वत्स, पर मैं परेशान यह सोच कर हूँ कि सच क्या है? मैं कौन हूँ - एक आदमी जो सपने में तितली बन गया था, या एक तितली जो सपने में अपने को एक आदमी के रूप में देख रही है?"

    जो अच्छा लगे उसको सहेजना चाहिए....

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  2. I hope you will share this inspiring poetry will all those persons striving for perfection and competing in life to prove their worth.

    Thank you.

    ReplyDelete

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